Author name: sonia.civil02@gmail.com

Uncategorized

टॉप 5 श्री खाटू श्याम भजन

खाटू धाम का नाम आते ही मन श्रद्धा, प्रेम और भक्ति से भर उठता है। श्याम बाबा की महिमा इतनी अपरंपार है कि उनका एक भजन सुनते ही मन की सारी थकान दूर हो जाती है और हृदय में नई ऊर्जा का संचार होने लगता है। भजनों के माध्यम से भक्त न केवल बाबा से जुड़ते हैं, बल्कि अपने जीवन के दुःख, संघर्ष और मनोकामनाएँ भी उनके चरणों में अर्पित करते हैं। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं टॉप 5 श्री खाटू श्याम भजन, जिन्होंने लाखों भक्तों के हृदय को स्पर्श किया है और जिन्हें सुनते ही आँखों में भक्ति की चमक और मन में शांति उतर आती है। ये भजन न केवल मधुर हैं, बल्कि अपने शब्दों में श्याम बाबा की अनंत कृपा, करुणा और लीला को समेटे हुए हैं। अगर आप श्याम प्रेमी हैं या भक्ति संगीत के रसिक, तो ये पाँच भजन आपकी प्लेलिस्ट में अवश्य होने चाहिए—क्योंकि ये सिर्फ गीत नहीं, श्याम बाबा की दिव्य उपस्थिति का अनुभव हैं। लगन तुमसे लगा बैठे,जो होगा देखा जाएगा,तुम्हे अपने बना बैठे,जो होगा देखा जाएगा।। कभी दुनिया से डरते थे,छुप छुप याद करते थे,लो अब परदा उठा बैठे,जो होगा देखा जाएगा। लगन तुमसे लगा बैठें,जो होगा देखा जाएगा,तुम्हे अपने बना बैठे,जो होगा देखा जाएगा।। कभी यह ख्याल था दुनिया,हमें बदनाम कर देगी,शर्म अब बेच खा बैठे,जो होगा देखा जाएगा। लगन तुमसे लगा बैठें,जो होगा देखा जाएगा,तुम्हे अपने बना बैठे,जो होगा देखा जाएगा।।  2. हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है,जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है,मेरे मांझी बन जाओ मेरी नाव चला जाओ,बेटे को बाबा श्याम गले लगा जाओ,हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है, मैंने सुना है तू दुखड़े मिटाता ,बिन बोले भक्तों की बिगड़ी बनाता,मिलता ना किनारा है ना कोई और सहारा है,हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है, तुमसे ही जीवन मेरा ओ मेरे बाबा,कैसे चलेगा समझ ना आता,तुम धीर बंधाते हो तो साँसें चलती हैं,मुझे समझ ना आता है मेरी क्या गलती है,हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है, परिवार मेरा तेरे गुण है जाता,दोषी तो मैं हूँ उन्हें क्यों सताता,उनको भी भरोसा है तूने पाला पोसा है,हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है, 3. साथी हमारा कौन बनेगा, तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा साथी हमारा कौन बनेगा, तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगातुम ना सुनोगे कौन सुनेगा आ गया दर पे तेरे, सुनाई हो जायेजिंदगी से दुखो की, विदाई हो जायेएक नजर कृपा की डालो, मानुगा अहसान ॥संकट हमारा कैसे टलेगातुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा……. पानी हे सर से ऊपर, मुसीबत अड़ गयी हे,आज हमको तुम्हारी, जरुरत पद गयी हेअपने हाथ से हाथ पकड़लो, मानुगा अहसान ॥साथ हमारे कौन चलेगातुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा…….. तुम्हारे दर पे शायद, हमेशा धर्मी आते,आज पापी आया हे, श्याम काहे घबरातेहमने सुना हे तेरी नजर में, सब हे एक समान ॥इसका पता तो आज चलेगातुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा…….. वो तेरे भकत होंगे, जिन्हे हे तुमने तारा,बता ए मुरलीवाले, कौन सा तीर माराभकत तुम्हारे भक्ति करते, लेते रहते नाम ॥काम ती उनका करना पड़ेगातुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा………… पाप की गठड़ी सर पर, लाढ कर में लायाबोझ कुछ हल्का कर दे, उठाने ना पायाफर्ज की रह बता संजू, हो जाये कल्याण ॥इसमें तुम्हारा कुछ ना घटेगातुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा……… साथी हमारा कौन बनेगा, तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगातुम ना सुनोगे कौन सुनेगा 4. प्यारा सा मुखड़ा, घुंघराले केश प्यारा सा मुखड़ा, घुंघराले केश,कलयुग का राजा, खाटू नरेश,हारे का सहारा है, मेरा श्याम धणी,भक्तों का दुलारा है, मेरा श्याम धणी। बन सँवर के बैठा,ये तो दरबार अपना लगा के,देख लो करिश्मा,श्याम चरणों में सर को झुका के,कष्ट कटे दुखड़े मिटें,देता छुटकारा है, मेरा श्याम धणी,भक्तों का दुलारा है, मेरा श्याम धणी। आ रहे है लाखो,श्याम बाबा का करते है दर्शन,ध्यान से जो देखे,इनके चेहरे में है वो आकर्षण,दीवाना कर देता,ऐसा जादुगारा है, मेरा श्याम धणी,भक्तों का दुलारा है, मेरा श्याम धणी। जो भी हो जरुरत,सच्चे मन से तू अर्जी लगा दे,चाहिए अगर कुछ,इसकी चौखट पे पल्ला बिछा दे,कितनो के किस्मत की,रेखा को सँवारा है, मेरा श्याम धणी,भक्तों का दुलारा है, मेरा श्याम धणी। मुझको जो कुछ मिला है,कैसे शब्दों में वर्णन करूँ मैं,बार बार आकर,इस दाता के पैंया पकड़ूँ,दिल मेरा यूँ बोले,बिन्नू ये तुम्हारा है, मेरा श्याम धणी,भक्तों का दुलारा है, मेरा श्याम धणी। प्यारा सा मुखड़ा, घुँघराले केश,कलयुग का राजा, खाटू नरेश,हारे का सहारा है, मेरा श्याम धणी,भक्तों का दुलारा है, मेरा श्याम धणी। 5. किस्मत वालों को मिलता है श्याम तेरा दरबार किस्मत वालों को मिलता है, श्याम तेरा दरबारसच्ची सरकार तुम्हारी, सांचा दरबार, किस्मत… जो भी गया है श्याम प्रभु के द्वार, पाया उसने सांवरिये का प्यार ।एक झलक जिसको भी मिल जाये, महक उठे मन बगिया खिल जाए ।खाली झोली जो लाए, भरता भण्डार, किस्मत वालों को… कलयुग में बस एक सहारा है, खाटू वाला श्याम हमारा है ।चारों तरफ दरबार की चर्चा है, हाथों हाथ ये देता पर्चा है ।ऐसा ये देव दयालु, है लखदातार, किस्मत वालों को… दुखड़े अपने इन्हें सुना जाओ, भक्तो श्याम शरण में आ जाओ ।बिगड़ी बातें श्याम बनायेगा, जब भी पुकारो दौड़ा आयेगा ।पल-भर की देर करे ना, ऐसा दिलदार, किस्मत वालों को… अंत में, श्याम बाबा के भजन केवल संगीत नहीं हैं, बल्कि मन को शांति देने वाली एक आध्यात्मिक अनुभूति हैं। हर भजन हमें उनके आशीर्वाद, उनकी करुणा और उनके अनंत प्रेम का एहसास कराता है। जब भी मन विचलित हो, राहें कठिन हों या बस आत्मा को कुछ सुकून चाहिए—श्याम बाबा के भजनों का सहारा हमेशा दिल को नई ऊर्जा देता है। आशा है कि यह संग्रह आपको भक्ति के और करीब ले जाएगा और आपके दिन में थोड़ा सा प्रकाश जोड़ पाएगा।भक्ति बनी रहे, श्रद्धा बनी रहे, और श्याम बाबा की कृपा सदा आपके साथ बनी रहे। जय श्री श्याम।

Uncategorized

कौन हैं खाटू श्याम बाबा? क्यों खाटू श्याम बाबा कहलाते हैं ‘श्याम’

राजस्थान के सीकर ज़िले में स्थित श्री खाटू श्याम जी का मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लाखों भक्त हर साल यहां बाबा का दर्शन करने आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं — आखिर श्याम बाबा कौन थे? उनका जन्म कैसे हुआ ? आइए इस ब्लॉग में सरल भाषा में जानते हैं खाटू श्याम बाबा की पूरी कहानी। खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक है खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक है. महाभारत की एक कहानी के अनुसार बर्बरीक का सिर राजस्थान के खाटू नगर में दफना दिया था. इसीलिए बर्बरीक जी का नाम खाटू श्याम बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुआ. वर्तमान में खाटूनगर सीकर जिले के नाम से जाना जाता है. खाटू श्याम बाबा जी कलियुग में श्री कृष्ण भगवान के अवतार के रूप में माने जाते हैं. बलशाली भीम और उनकी पत्नी हिडिम्बा के पोते थे बर्बरीक श्याम बाबा घटोत्कच और नाग कन्या मौरवी के पुत्र हैं. पांचों पांडवों में सर्वाधिक बलशाली भीम और उनकी पत्नी हिडिम्बा बर्बरीक के दादा दादी थे. कहा जाता है कि जन्म के समय बर्बरीक के बाल बब्बर शेर के समान थे, अतः उनका नाम बर्बरीक रखा गया. तीन बाणधारी के रूप में भी प्रसिद्ध है बर्बरीक बचपन में एक वीर और तेजस्वी बालक थे. बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण और अपनी माँ मौरवी से युद्धकला, कौशल सीखकर निपुणता प्राप्त कर ली थी. बर्बरीक ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिसके आशीर्वादस्वरुप भगवान शिव ने बर्बरीक को 3 चमत्कारी बाण प्रदान किए. इसी कारणवश बर्बरीक का नाम तीन बाणधारी के रूप में भी प्रसिद्ध है. भगवान अग्निदेव ने बर्बरीक को एक दिव्य धनुष दिया था, जिससे वो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने में समर्थ थे. हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा जब कौरवों-पांडवों का युद्ध होने की सूचना बर्बरीक को मिला तो उन्होंने भी युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया. बर्बरीक अपनी माँ का आशीर्वाद लिए और उन्हें हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन देकर निकल पड़े. इसी वचन के कारण हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा यह बात प्रसिद्ध हुई. श्री कृष्ण ने बर्बरीक से प्रश्न किया जब बर्बरीक जा रहे थे तो उन्हें मार्ग में एक ब्राह्मण मिला. यह ब्राह्मण कोई और नहीं, भगवान श्री कृष्ण थे जोकि बर्बरीक की परीक्षा लेना चाहते थे. ब्राह्मण बने श्री कृष्ण ने बर्बरीक से प्रश्न किया कि वो मात्र 3 बाण लेकर लड़ने को जा रहा है ? मात्र 3 बाण से कोई युद्ध कैसे लड़ सकता है. बर्बरीक ने कहा कि उनका एक ही बाण शत्रु सेना को समाप्त करने में सक्षम है और इसके बाद भी वह तीर नष्ट न होकर वापस उनके तरकश में आ जायेगा. अतः तीनों तीर के उपयोग से तो सम्पूर्ण जगत का विनाश किया जा सकता है. ब्राह्मण ने बर्बरीक से एक पीपल के वृक्ष की ओर इशारा करके कहा कि वो एक बाण से पेड़ के सारे पत्तों को भेदकर दिखाए. बर्बरीक ने भगवान का ध्यान कर एक बाण छोड़ दिया. उस बाण ने पीपल के सारे पत्तों को छेद दिया और उसके बाद बाण ब्राह्मण बने कृष्ण के पैर के चारों तरफ घूमने लगा. असल में कृष्ण ने एक पत्ता अपने पैर के नीचे छिपा दिया था. बर्बरीक समझ गये कि तीर उसी पत्ते को भेदने के लिए ब्राह्मण के पैर के चक्कर लगा रहा है. बर्बरीक बोले – हे ब्राह्मण अपना पैर हटा लो, नहीं तो ये आपके पैर को वेध देगा. श्री कृष्ण बर्बरीक के पराक्रम से प्रसन्न हुए. उन्होंने पूछा कि बर्बरीक किस पक्ष की तरफ से युद्ध करेंगे. बर्बरीक बोले कि उन्होंने लड़ने के लिए कोई पक्ष निर्धारित नहीं किया है, वो तो बस अपने वचन अनुसार हारे हुए पक्ष की ओर से लड़ेंगे. श्री कृष्ण ये सुनकर विचारमग्न हो गये क्योकि बर्बरीक के इस वचन के बारे में कौरव जानते थे. कौरवों ने योजना बनाई थी कि युद्ध के पहले दिन वो कम सेना के साथ युद्ध करेंगे. इससे कौरव युद्ध में हारने लगेंगे, जिसके कारण बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ने आ जायेंगे. अगर बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ेंगे तो उनके चमत्कारी बाण पांडवों का नाश कर देंगे. शीश का दान कौरवों की योजना विफल करने के लिए ब्राह्मण बने कृष्ण ने बर्बरीक से एक दान देने का वचन माँगा. बर्बरीक ने दान देने का वचन दे दिया. अब ब्राह्मण ने बर्बरीक से कहा कि उसे दान में बर्बरीक का सिर चाहिए. इस अनोखे दान की मांग सुनकर बर्बरीक आश्चर्यचकित हुए और समझ गये कि यह ब्राह्मण कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है. बर्बरीक ने प्रार्थना कि वो दिए गये वचन अनुसार अपने शीश का दान अवश्य करेंगे, लेकिन पहले ब्राह्मणदेव अपने वास्तविक रूप में प्रकट हों. भगवान कृष्ण अपने असली रूप में प्रकट हुए. बर्बरीक बोले कि हे देव मैं अपना शीश देने के लिए वचनबद्ध हूँ लेकिन मेरी युद्ध अपनी आँखों से देखने की इच्छा है. श्री कृष्ण बर्बरीक ने बर्बरीक की वचनबद्धता से प्रसन्न होकर उसकी इच्छा पूरी करने का आशीर्वाद दिया. बर्बरीक ने अपना शीश काटकर कृष्ण को दे दिया. श्री कृष्ण ने बर्बरीक के सिर को 14 देवियों के द्वारा अमृत से सींचकर युद्धभूमि के पास एक पहाड़ी पर स्थित कर दिया, जहाँ से बर्बरीक युद्ध का दृश्य देख सकें. इसके पश्चात कृष्ण ने बर्बरीक के धड़ का शास्त्रोक्त विधि से अंतिम संस्कार कर दिया.  श्री कृष्ण वीर बर्बरीक की महानता से अति प्रसन्न हुए महाभारत का महान युद्ध समाप्त हुआ और पांडव विजयी हुए. विजय के बाद पांडवों में यह बहस होने लगी कि इस विजय का श्रेय किस योद्धा को जाता है. श्री कृष्ण ने कहा – चूंकि बर्बरीक इस युद्ध के साक्षी रहे हैं अतः इस प्रश्न का उत्तर उन्ही से जानना चाहिए. तब परमवीर बर्बरीक ने कहा कि इस युद्ध की विजय का श्रेय एकमात्र श्री कृष्ण को जाता है, क्योकि यह सब कुछ श्री कृष्ण की उत्कृष्ट युद्धनीति के कारण ही सम्भव हुआ. विजय के पीछे सबकुछ श्री कृष्ण की ही माया थी. बर्बरीक के इस सत्य वचन से देवताओं ने बर्बरीक पर पुष्पों की वर्षा की और उनके गुणगान गाने लगे. श्री कृष्ण वीर बर्बरीक की महानता से अति प्रसन्न हुए और उन्होंने

Uncategorized

खाटू वाले का दरबार निराला — क्यों है यह स्थान इतना पवित्र और अनोखा?

भारत अनेक तीर्थस्थलों का देश है, लेकिन खाटू श्याम बाबा का पवित्र दरबार अपने आप में बेहद खास है। लाखों भक्तों की आस्था और अनगिनत चमत्कारों के कारण इसे “निराला दरबार” कहा जाता है। चाहे कोई पहली बार आए या हर साल, बाबा का स्पर्श हर भक्त को नई ऊर्जा देता है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि खाटू वाले का दरबार निराला क्यों कहलाता है, और खाटू धाम की दिव्यता भक्तों के लिए इतना आकर्षक कैसे बनती है। 1. खाटू धाम का परिचय — भारत का प्रसिद्ध तीर्थस्थान राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम विश्वभक्ति का केंद्र है। यहाँ स्थित खाटू श्याम मंदिर हर दिन हजारों भक्तों को दर्शन देता है। श्याम बाबा को कलियुग का “दाता” माना गया है क्योंकि वे हर मनोकामना पूर्ण करने के लिए जाने जाते हैं। भक्त कहते हैं—  “जो भी खाटू आया, कभी खाली नहीं गया।” 2. ‘दरबार निराला’ क्यों कहलाता है? खाटू श्याम का दरबार कई कारणों से सबसे अलग है: (1) यहाँ समानता है अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा—हर कोई बाबा का ही बच्चा है। (2) बाबा को ‘मित्र’ की तरह पूजा जाता है कहीं डर नहीं, बस प्रेम और अपनापन। (3) बाबा की कृपा बहुत जल्दी मिलती है भक्त कहते हैं— “श्याम देरी कर सकते हैं, लेकिन अंधेरी नहीं रहने देते।” (4) यहाँ भक्ति और संगीत बहता है कीर्तन, भजन, ढोल-नगाड़े—यहां भक्ति का अलग ही रंग है। 3. बर्बरीक का इतिहास — कैसे बने ‘खाटू श्याम बाबा’ महाभारत के समय महान वीर बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान दिया था।उनके इस अद्वितीय बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने कहा— “कलियुग में तुम श्याम नाम से पूजे जाओगे।” उनका सिर युद्ध समाप्ति तक ऊँची जगह पर रखा गया, और आज वही खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजे जाते हैं। यह इतिहास ही इस दरबार को दिव्य और अनोखा बनाता है। 4. खाटू वाले का श्रृंगार — मन मोह लेने वाला दर्शन खाटू धाम का सबसे आकर्षक हिस्सा है बाबा का सिंहासन और श्रृंगार। दर्शन करते ही ऐसा लगता है जैसे बाबा स्वयं अपना आशीर्वाद दे रहे हों। कई भक्त कहते हैं— “पहली झलक में ही मन शीतल हो जाता है।” 5. मंदिर का वातावरण — जहाँ भक्ति बहती है अगर कोई व्यक्ति तनाव में हो, दुखी हो, अकेला हो — बस एक बार दरबार में प्रवेश कर ले…उसके मन की भारी ऊर्जा स्वतः समाप्त हो जाती है। ये सब मिलकर एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा पैदा करते हैं। 6. श्याम भजन और संकीर्तन — भक्तों की आत्मा से जुड़ाव दरबार में गाए जाने वाले भजन जैसे— इन भजनों में ऐसी ताकत है कि भक्त रो पड़ते हैं, झूमने लगते हैं, बाबा से सीधा जुड़ाव महसूस करते हैं।  शायद इसी भावना से कहा जाता है— “श्याम नाम ही सबसे बड़ी दवा है।”  7. फाल्गुन मेला — खाटू का सबसे बड़ा आयोजन हर साल फाल्गुन मास में आयोजित होने वाला विशाल मेला दुनिया भर के भक्तों को एक जगह जोड़ता है। लाखों लोग दर्शन पाने आते हैं। यह मेला खाटू धाम की पहचान बन चुका है। 8. भक्तों के चमत्कारिक अनुभव असंख्य भक्तों का कहना है कि— श्याम बाबा पर सच्चे मन से विश्वास करने पर चमत्कार होना सामान्य है। 9. खाटू धाम में सेवा — बाबा तक पहुंचने का सच्चा मार्ग सेवा के कुछ प्रमुख रूप हैं: सेवा करने वाला व्यक्ति बाबा के और भी करीब पहुँच जाता है। 10. भक्त और बाबा का रिश्ता — प्रेम और विश्वास का बंधन श्याम बाबा अपने भक्तों से कहते हैं— “एक कदम तुम बढ़ाओ, सौ कदम मैं आऊँगा।” यह रिश्ता किसी भी दूसरे ईश्वर से अलग है —यह रिश्ता प्रेम, भरोसे और निष्ठा पर आधारित है। क्यों खाटू वाले का दरबार सच में ‘निराला’ है? क्योंकि यहाँ— इसलिए भक्त पूरे विश्वास से कहते हैं— “खाटू वाले का दरबार निराला, जो आया वह खाली न गया।”

Uncategorized

खाटू श्याम जी के भजन,कीर्तन और संगीत भक्ति, भाव और दिव्य ऊर्जा का संगम

खाटू श्याम जी सिर्फ “हारे का सहारा” नहीं हैं, वे दर्द को संगीत में बदल देने वाले देवता हैं। श्याम भजन, कीर्तन और संगीत में ऐसी शक्ति है कि थका हुआ मन खिल उठता है, रोता हुआ दिल मुस्कुरा उठता है, और टूटी हुई आस को नया जीवन मिलता है। क्योंकि यहाँ श्याम नाम की कृपा बरसती है वहाँ सिर्फ संगीत नहीं चलता, वहाँ कृपा बहती है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे— खाटू श्याम जी के भजनों की शक्ति क्या है? भजन मन को कैसे बदल देते हैं? लोकप्रिय भजनों से लेकर कीर्तन परंपरा तक और क्यों श्याम भजन को “दिव्य चिकित्सा” कहा जाता है। 1. श्याम भजनों का मूल — भक्ति में संगीत और समर्पण का भाव भजन सिर्फ गाने नहीं होते; वे प्रार्थना, समर्पण और प्रेम के स्वर हैं। जब खाटू श्याम जी का भजन बजता है, तो लगता है कि— मन का बोझ हल्का हो रहा है चिंता दूर जा रही है दिल में मधुर ऊर्जा उतर रही है यह इसलिए क्योंकि श्याम जी की भक्ति का आधार ही है: सच्चा भाव। भक्ति में जब संगीत जुड़ता है, तो वह सीधा आत्मा तक पहुँचता है। इसीलिए कहा जाता है: “संगीत वह भाषा है जिसे श्याम जी सबसे जल्दी सुन लेते हैं।” 2. श्याम भजनों की सबसे बड़ी शक्ति — मन को शांत करना आज के समय में तनाव, चिंता और उलझनों से मन भरा रहता है। ऐसे में श्याम भजन मन के लिए दवा की तरह है। भक्ति संगीत से हमारे भाव को बल मिलता है| नकारात्मक विचार कम होते हैं मन एकाग्र होता है भावनाएँ संतुलित होती हैं दिल में आशा और धैर्य आता है मन की बेचैनी दूर होती है कई भक्त कहते हैं— “जब भजन बजता है, ऐसा लगता है जैसे किसी ने सिर पर हाथ रख दिया हो।” 3. लोकप्रिय श्याम भजन जो हर भक्त को छू जाते हैं श्याम भजनों की दुनिया बहुत विशाल है। कई प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और भक्तों ने गीत समर्पित किए हैं। कुछ ऐसे भजन हैं जिन्हें सुनकर आँखें भर आती हैं: 1. “हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा” यह भजन श्याम जी का सबसे बड़ा परिचय है। 2. “मेरे श्याम तुझे प्यार करूँगा” जिसे सुनकर मन भगवान से जुड़ जाता है। 3. “खाटू में आज भी श्याम बसे हैं” यह भजन सुनते ही खाटू धाम का दृश्य मन में उतर आता है। 4. “बरस पड़े नेमतें, बाबा श्याम दरबार की” भक्तों को बाबा की कृपा याद दिलाता है। 5. “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम” कृष्ण और श्याम की एकात्मता पर आधारित। और ऐसे सैकड़ों भजन हैं जो हर भक्त की कहानी, हर दिल की पीड़ा और हर उम्मीद का संगीत बन जाते हैं। 4. श्याम भजनों की अनुभूति — क्यों रोने लगता है दिल? कई भक्त बताते हैं कि— भजन सुनते-सुनते आँखें भर आईं दिल भारी होकर हल्का हो गया मन में अचानक शांति उतर आई लगता है बाबा यहीं पास में हैं यह इसलिए होता है क्योंकि— 1. भजन मन के सबसे गहरे हिस्से को छूते हैं 2. भक्ति संगीत भावनाओं को साफ करता है 3. जब हम गाते हैं, हम अपने बोझ उतारते जाते हैं 4. श्याम नाम के भजन से निर्भयता और शक्ति प्राप्त होती है | यह अनुभव सिर्फ भक्त की दुनिया समझ सकती है। 5. श्याम मण्डलों की विशेष परंपरा — सेवा + संगीत + समर्पण पूरे भारत में हजारों श्याम मण्डल हैं। इनका उद्देश्य है: भजन कीर्तन करना सेवा कार्यक्रम चलाना भक्तों को जोड़ना मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में सहयोग देना श्याम मण्डलों की सबसे खूबसूरत बात है— इनमें भक्ति के साथ परिवार जैसी गर्माहट होती है। कहीं— भजन संध्या होती है कहीं जागरण कहीं अखंड कीर्तन कहीं प्रभु की झांकी सजती है और कहीं श्याम भक्ति का नृत्य होता है यह आनंद सिर्फ देखने का नहीं, जीने का अनुभव है। 6. कैसे करें घर पर भजन और कीर्तन? अगर आप घर में ही श्याम भक्ति करना चाहते हैं, तो कोई बड़े इंतज़ाम की जरूरत नहीं। बस— एक दीपक एक तस्वीर और एक भजन रात में 10–15 मिनट भी भजन कर लें, तो मन में इतनी शांति मिलती है कि दिन भर की थकान मिट जाती है। चाहें तो अपने घर में— साप्ताहिक भजन संध्या मासिक कीर्तन परिवार संग भजन गायन भी आयोजित कर सकते हैं। श्याम जी घर में “संगीत” के माध्यम से प्रवेश करते हैं। —

Scroll to Top