सोनिया शर्मा (संस्थापिका, राजयोग फाउंडेशन) की हृदयस्पर्शी कथा
श्याम बाबा मेरे लिए कोई कहानी नहीं हैं, बल्कि मेरे जीवन का वह हिस्सा हैं जिसके बिना शायद मेरा साँस लेना भी मुश्किल हो जाता। बाराबंकी के मजीठा में स्थित खाटू श्याम मंदिर का निर्माण किसी योजना या महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि उसी अनकहे भाव और दिव्य अनुभव से शुरू हुआ जो मुझे पहली बार 2018 में खाटू धाम (राजस्थान) जाकर हुआ।
जब मैंने पहली बार बाबा के दर्शन किए, तो ऐसा लगा मानो मैं अपने पिता के चरणों में खड़ी हूँ। एक ऐसी अनुभूती, एक ऐसा स्पर्श जिसे मैं शब्दों में बया नहीं कर सकती। प्रभु को निहारते ही एक ऐसा सुकून, ऐसी शांति की अनुभूति का अनुभव हुआ , जैसे वह मुझसे कह रहे हो “तू चिंता मत कर हर कदम पर मैं तेरे साथ हूं!”
मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि मैं किसी मंदिर के निर्माण का संकल्प भी लूंगी— और वह भी श्याम बाबा का। लेकिन 2019 में जब मैं दोबारा खाटू गई, उस बार मेरी भक्ति और भाव दोनों और गहरे हो चुके थे। बाबा से मेरा रिश्ता ऐसा है जैसे पिता और बेटी का | जो भी दुख दर्द समस्या या कोई खुशी सब मैं बाबा से ही कहती हूं।। उनके दर्शन करते ही मेरी सारी पीड़ाएँ, कष्ट जैसे मिट जाते हैं। रुके हुए कार्य बिना प्रयास के स्वतः ही बनने लग जाते हैं|
फिर 2020 और 2021 में कोविड आ गया— दर्शन का क्रम रुक गया। परंतु 2022 में एक रात भजन सुनते हुए मेरे भीतर एक भाव जगा। भजन सुनते हुए आंखों से स्वतः ही आंसू बहने लगे क्योंकि कोविड के बाद में कई समस्याओं से घिर गई। भजन सुनते सुनते, मैंने अपने दिल की बात बाबा से कहा कि मैं रींगस से खाटू तक निशान लेकर पैदल चल कर आप के दरबार में हाजिरी लगाऊंगी|
आश्चर्य तो तब हुआ जब अगले दो-तीन महीने में मेरी समस्याएं स्वतः ही कम होने लगी। नवंबर की एकादशी को मैं रिंगस पहुँची। रात 11 बजे यात्रा शुरू हुई और सुबह लगभग 5 बजे मैंने बाबा को निशान अर्पित किया।
कोविड से पहले 13 सीढ़ियाँ चढ़ते ही दर्शन हो जाते थे, पर बाद में बहुत कुछ बदल गया था।बहुत सी व्यवस्था बदल गई थी पर भाव तो वही था। वापस घर लौट कर मेरे जीवन में फिर से धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव होने लगे। मैंने अपने व्यापार को बड़े प्रेम, परिश्रम और लगन से खड़ा किया था जिसमें अब फिर से बाबा की कृपा से प्रगति होने लगे | मेरे व्यापारिक स्थल पर श्याम बाबा की ज्योत प्रज्वलित करने और कीर्तन कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
फिर कुछ दिनों बाद मुझे एक दिव्य स्वप्न आया। स्वप्न में बाबा ने दिव्य और विराट स्वरूप के दर्शन देते हुए मुझसे कहा, “ सोनिया, मुझे भी बाराबंकी में विराजमान करो”। 4:00 बजे के करीब नींद खुलते ही मेरी सांस बहुत तेज चल रही थी और दिल तेजी से धड़क रहा था। मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। किससे बात करूं, क्या बात करूं।
मेरे पहचान में एक बहुत बड़े श्याम भक्त हैं जो बाबा का मंदिर बहुत समय से बनाने का सोच रहे थे और लोगों से बात भी कर रहे थे। एक बार उन्होंने मुझसे भी यह बात बताई थी। तुरंत मेरे मन में ख्याल आया कि बाबा के सपने के बारे में उनको बताया जाए जैसे मैंने श्याम बाबा के इस सपने का जिक्र किया। उन्होंने तुरंत बिना कुछ सोचे समझे मुझे कहा “ मंदिर बनवाओ, मैं तुम्हें ज़मीन दूँगा। निर्माण में जो भी मुझसे बन पाएगा, मैं करता रहूँगा।”
उनका साथ मिलते ही 2023 में यह दिव्य यात्रा आरम्भ हुई | सिर्फ 15 दिनों की तैयारी में जून 2023 में भूमि पूजन हुआ। उसके बाद जैसे बाबा ने स्वयं मार्ग प्रशस्त कर दिया।आज बाराबंकी–मजीठा का खाटू श्याम मंदिर किसी परिचय का मोहताज नहीं है।लाखों की आस्था का केंद्र बन चुका है। बाबा के भक्त दूर-दूर से अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं और उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
श्री मनोज जायसवाल राजयोग फाउंडेशन के सह-संस्थापक, सेवा, समर्पण और आस्था के प्रतीक
राजयोग फाउंडेशन के सह-संस्थापक श्री मनोज जायसवाल न केवल एक दूरदर्शी सामाजिक व्यक्तित्व हैं, बल्कि श्याम बाबा के प्रति अटूट भक्ति और सेवा-भाव के जीवंत उदाहरण भी हैं।
मंदिर निर्माण के पवित्र कार्य में उनका योगदान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पूर्णतः आत्मिक और भावनात्मक है।
जब बाराबंकी में श्याम बाबा के मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया, तब बिना एक क्षण सोचे उन्होंने अपनी भूमि पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ बाबा को समर्पित कर दी।
यह दान केवल ज़मीन का दान नहीं था यह आस्था, त्याग, समर्पण और धर्म के प्रति कर्तव्य का सर्वोच्च रूप था।
उनकी इस उदारता ने मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और आज मजीठा का खाटू श्याम मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बन चुका है।
मनोज जी का यह योगदान आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा क्योंकि उन्होंने धर्मस्थापना के इस महान कार्य को अपने तन–मन–धन से साकार किया है।
वे सचमुच उस भावना के धनी हैं जहाँ व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, धर्म और मानवता के लिए कार्य करता है।
Mission
- हम सनातन मूल्यों, आस्था और संस्कारों को हर पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प लेते हैं।
- हम धर्म और समाज की निस्वार्थ सेवा के लिए गौ-सेवा, अन्नक्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।
- हमारा उद्देश्य मंदिर को योग, ध्यान और सांस्कृतिक शिक्षा का जीवंत आध्यात्मिक केंद्र बनाना है।
- हम दान और निर्माण के हर चरण में पारदर्शिता, ईमानदारी और उत्तरदायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
- हमारा लक्ष्य है कि हर भक्त को सहज, सम्मानित और दिव्य अनुभव मिले ताकि श्याम बाबा की कृपा अधिक लोगों तक पहुँच सके।
Vision
- हमारा ध्येय है कि मंदिर हर थके हुए मन के लिए ऐसा पावन आश्रय बने, जहाँ प्रवेश करते ही आत्मा को सुख और शांति का अनुभव हो।
- हमारा ध्येय है कि समाज में करुणा, सत्य, सेवा और समभाव जैसे सनातन मूल्यों की लौ फिर से उज्ज्वल होकर हर हृदय को प्रकाशित करे।
- हमारा ध्येय है कि मंदिर भक्ति, योग, ध्यान और संस्कृति का ऐसा जीवंत प्रकाश-केंद्र बने, जो जीवन को दिशा दे और भीतर की दिव्यता को जगाए।
- हमारा ध्येय है कि आने वाली पीढ़ियों के हृदय में ऐसे संस्कार बोए जाएँ जो उन्हें चरित्रवान, संवेदनशील और मानवता से परिपूर्ण बनाएँ।
“संकल्प से सिद्धि तक” राजयोग फाउंडेशन की साधना
राजयोग फाउंडेशन के लिए यह मंदिर निर्माण केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक पवित्र संकल्प है जिसे हम भक्तों की आस्था और श्याम बाबा की कृपा से सिद्धि तक पहुँचाने का व्रत लेकर चल रहे हैं जिस दिन इस दिव्य धाम का संकल्प लिया गया, उसी दिन एक ऐसी यात्रा शुरू हुई जिसमें हर ईंट भक्ति बन गई, हर कदम सेवा बन गया, और हर सहयोग बाबा का आशीर्वाद बनकर जुड़ गया आज राजयोग फाउंडेशन उसी संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाने के लिए निष्ठा, पारदर्शिता और पूर्ण समर्पण के साथ श्याम धाम के निर्माण में रत है ताकि वह क्षण आए जब भक्त गर्व से कह सकें कि “इस धाम की हर ईंट में हमारी आस्था और राजयोग का संकल्प समाया है।”